तरजुमा
Freedom by Bethany Maxwell
दक्षिणी सूडान ने वर्षों अपनी पहचान के लिए संघर्ष किया अंततः पिछले साल नया देश बना. यह उत्तरी सूडान से अलग अपने अस्मिता का प्रतीक है. यह कविता इसी की आवाज़ है.

आज़ादी

अनुवाद : खुर्शीद अनवर

मुझको समझाओ कि आज़ादी का मफ़हूम है क्या
मेरी माँ मुझको मेरे फैसलों को इज्ज़त दे ?
यही आज़ादी है क्या ?
कि मैं जो ख्वाहिशें रखती हूं उन्हें पूरा करूँ ?
और तबस्सुम से हूं लबरेज़
मैं खुद जब चाहूँ
कोई चाहे कि नहीं मैं चाहूँ
यही आज़ादी है क्या ?
किसी बंदिश किसी ज़ंजीर के डर से आगे
जिस तरह चाहूँ उसी तरह जिऊँ
यही आज़ादी है क्या ?
अपनी मंज़िल की और तक़दीर की तारीख लिखूं
यही आज़ादी है क्या ?

अपने ही पहलू में मैं बैठूं जुदा इस दुनिया से
यही आज़ादी है क्या ?
अपनी शर्तों पे मैं तारीख और तक़दीर लिखूं
अपने ही मुल्क की और उस से मोहब्बत की बात
लिख सकूँ गर बस इतना तो समझना यह कि

मेरी आज़ादी है बस यह मेरी आज़ादी है
डॉ. खुर्शीद अनवर
माँ और धरती माँ
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