तरजुमा
Look at me by Nahida Izzat

इक नज़र देखो मुझे

अनुवाद : खुर्शीद अनवर

इक नज़र देखो मुझे
मेरी चाहत है मैं नग्में मुहब्बत के लिखूं
रंग में ढाल दूँ मैं तितलियाँ और इन्द्रधनुष
अपनी साँसों में बसा लूँ मैं गुलाबों कि महक
और मैं रक्स करूँ
साज़-ओ-आवाज़ परिंदों कि हों मैं रक्स करूँ
नौनिहालों के तबस्सुम के नजारों को मैं
बंद पलकें लिए तकती रहूँ मैं मुद्दत तक
उनकी पेशानी पे बंदूक के साये भी न हों
दूर परियों के देश से लाकर
कुछ कहानी सुनाऊं बच्चों को
किसी बंदूक की धमक की नहीं
तोप, मीज़ाइल की गरज की नहीं
लेकिन मुमकिन है क्या कि ऐसा हो?
मेरे दिल में धंसा है इक खंजर
दर्द से सीना मेरा छलनी है
खून रिसता है चीख पड़ती हूँ

बोल इंसानियत कहाँ है तू
तेरी नज़रों के सामने ही मै
ज़बह होती हूँ लम्हा दर लम्हा
देख मैं चीखती हूँ सहमी हूँ
बोल इंसानियत कहाँ है तू
किस लिए तूने मोड ली नज़रें
क्यों यह चेहरा छुपा लिया तूने
मैं यहाँ सड रही हूँ मुद्दत से
गाज़ा की चीखती सी सड़कों पे
आ मिला मुझ से तू ज़रा नज़रें
सिसकियाँ भर रही हूँ देख यहाँ
गाज़ा की चीखती सी सड़कों पे
सुन मेरे बैन देख अश्क मेरे
बोल इंसानियत तू बोल ज़रा
खोल अपनी यह बंद नज़रें तू
खोल बहरे जो कान हैं तेरे
जबकि मैं खुद और मेरे साथ ही साथ
मेरे मासूम नौनिहाल यहाँ
मौत की नींद सोने वाले हैं।

डॉ. खुर्शीद अनवर
माँ और धरती माँ
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