कविताएं
मलाला के नाम

डॉ. खुर्शीद अनवर

खून फिर कूचा-ओ-बाज़ार में आ निकला है
खून टपका है हरफ़ बन के हर एक कोने में
रौशनी बन के चमकता है हर एक सीने में
टैंक, बन्दूक से डरता नहीं यह खून है वह
दस्त-ए-क़ातिल को मिटा सकता है यह खून है वह
तख़्त और ताज हिला सकता है यह खून है वह
ज़ुल्म का नाम मिटा सकता है यह खून है वह
खून फिर कूचा-ओ-बाज़ार में आ निकला है
आओ इबलीस के फरज़न्दो अगर हिम्मत हो
देखो इस खू कि जेला तुम में अगर ताकत हो
इल्म के दुश्मनों, जल्लादों ज़मीं के धब्बे
वार करते हो ज़ेहानत पे हमेशा चुप के
यह मलाला का लहू एक समंदर होगा
जिसके तूफ़ान में तुम सब का सफीना होगा
देखो वह मौत का पैगाम चला आता है
खून का दरिया तुम्हारी ही तरफ आता है

डॉ. खुर्शीद अनवर
माँ और धरती माँ
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